मित्रो , ओपी की दुनिया में आप का स्वागत है. यह दुनिया भी आप की दुनिया की तरह उम्मीदों, संघर्षों , खुशियों , दुखों का एक ऐसा सम्मिश्रण है जिसमें बहुत कुछ नितांत व्यकितगत होते हुए भी ऐसा है जो हर किसी को न सिर्फ़ अपना महसूस होता है बल्कि जीवन में संघर्ष करते हुए निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. इसी लिए इस दुनिया को आप के साथ शेअर करने का मन बनाया है. उम्मीद करता हूँ की जो अच्छा हो उसे आप ग्रहण कर बाकि को भुला देगें. इसे बस एक ऐसा सफर माने जिसमे लोग मिलते है और बिछड़ जाते है. इस सफर में अगर कहीं कोई वात आप के दिल को छुए, आपकी संवेदना के तारों को झंकृत करे तो उससे मुझे अवश्य अवगत कराएं.....। मुझे आपकी टिप्पणियों को इंतजार रहेगा और वहीं मुझे ब्लागिंग के रास्ते पर आगे बढने की प्रेरणा देंगी। 08513834002 Saxena.op@gmail.com
मेरी जिंदगी
जिंदगी का गीत
तुम नहीं मिलतीं तो कैसे, जिंदगी के गीत गाता। खो गई थी सांस, मरुथल में कहीं जब.....। और, प्यासा, जिंदगी की बूंद को मैं....। आस भी कोई नहीं थी, बादलों की और मैं........। थक हार कर, यूं ही पड़ा था.....। बस, उसी पल तुम, किसी संजीवनी सी........। रूप के मुख पर, वही मुस्कान जीवन की लपेटे। गर नहीं आतीं तो कैसे, ठोकरों पर फिर जमाने को उठाता। तुम नहीं मिलतीं तो कैसे, जिंदगी के गीत गाता।। मैं हौसलों का रूप था, संबंध से हारा हुआ.......। प्यार के अनुबंध झूठे, जी रहा था.................। मोह का वो पाश भी, इतना कठिन था...........। अपमान पर अपमान को, मैं पी रहा था................। हर तरफ काला अंधेरा, और उसके बीच, डर से कांपता मैं.......। सब छूट जाने की व्यथा को, हौसलों से नापता मैं..........। एक दिन, फिर, कर उठा हुंकार, पौरुष जाग उट्ठा...............। छोड़ आया दर्द, और सारी व्यथाएं...............। कौन अपना है, पराया कौन, हम किसको बताएं..............। छोड़ने का सत्य शाश्वत, अपने सीने से लगाए...........। चल पड़ा, अनजान रस्तों पर, यूं ही मैं...........................। थी नहीं मंजिल कोई, जिसका पता मैं पूछ पाता.....। तुम नहीं मिलतीं तो कैसे, जिंदगी के गीत गाता।। फिर अचानक, एक आशा की किरण सी......। बादलों की ओट से, ऊंचे पहाड़ों पर फिसलती.......। देवदारों की तरह, अपनी भुजाओं को उठाए.......। सुख के आंचल में, वही चीनार की खुशबू सजाए...। पाता नहीं वरदान खुशियों के, अगर मैं वर न पाता। तुम नहीं मिलतीं तो कैसे जिंदगी के गीत गाता।। (अप्रकाशित)
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